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लौट आना…!!

बदले जो कभी तेरा इरादा तो लौट आना 

बदले जो कभी तेरा अपना तो लौट आना…..

मैं बैठी रहूँगी जिंदगी भर, जहाँ छोड़ा है तूने 

अगर कभी जगे मोहब्बत..
 तो लौट आना……. !!

अगर मिलती रहे  तूझे वफायें तो मत आना 

पर करे कोई बेवफाई….तो लौट आना………!! 

जब तक आजमाना हो आजमा दुनिया को 

पर जब थक कर टूट जाओ….तो लौट आना…!! 

जी लो अपने हिस्से की सारी खुशियां तुम 

जो मिलने लगे तुझे जख्म…. तो लौट आना…!!

सुनो …! जिंदगी भर भले तुम मत आना…. 

पर जब लूँ मैं आखिरी साँस…. तो लौट आना…….!! 

आओगे ना….????? 

क्यों लगते हो ??

तुम मौसम – मौसम लगते हो                              जो पल पल रंग बदलते हो…… 

तुम सावन – सावन लगते हो                              जो सदियों बाद बरसते हो…… 

तुम सपना – सपना लगते हो                             अक्सर ख्वाबों में दिखते हो…… 

तुम पल – पल मुझसे लड़ते हो                          पर फिर भी अच्छे लगते हो…. ..

                   बात तो है शर्मिली सी                                      पर कहने से दिल डरता है……. 

लो आज तुम्हें ये कहते हैं                                  तुम अपने अपने लगते हो……… !!!!

               अंत में… 

अब मैं कुछ कहना नहीं चाहती ,                    सुनना चाहतीं हूँ.                                          एक समर्थ सच्ची आवाज                               यदि कहीं हो !!!!                                        अन्यथा इससे पूर्व कि                                    मेरा हर कथन                                              हर मंथन                                                    हर अभिव्यक्ति                                            शून्य से टकरा कर फिर वापस लौट आए  ,       उस अनंत मौन में समा जाना चाहती हूँ……        जो मृत्यु है…………                                                    ” वह बिन कहे मर गई ”                  यह अधिक गौरवशाली है,                              यह कहे जाने से –                                                      ” कि वह मरने से पहले                         कुछ कह रही थी ..   ……                           जिसे किसी ने सुना नहीं… ” !!

            कोई है क्या ? 

अक्सर या कहें तो हर दिन कोई ना कोई यह  एहसास दिला देता है कि नहीं …….कोई नहीं है यहाँ…..हाँ कोई नहीं……..!!! 

हमारी गली में तो हैं……..आप के यहाँ भी होंगे,हाँ ……………सिंह….सिन्हा …मिष्रा. …….तिवारी……शर्मा…..वर्मा……ठाकुर..तांती. …….चामरिया….और भी हजारों होंगे पर एक वो नहीं होगा.  !!!

दूसरी गली में जाएं तो थोड़ा बेहतर…….. हाँ ……राजपूत ….लाला……कुर्मी…… मारवाडी….लोहार…सोनार……..डोम….चमार…..और भी हजारों मिलेंगे…. पर वो एक नहीं मिलेगा…..ना….. !!!!!

थोड़ा और पड़ोस में जाएं तो…….बैकवर्ड…….फौरवर्ड…….पिछड़ा…… अति पिछड़ा……और भी दो चार मिल जाएंगे…..पर वो एक नहीं…… नहीं मिलेगा…!!!!

थोड़ा बाहर जाऐं तो और बेहतर हैं…. ……हाँ……बिहारी……बंगाली…..पंजाबी….गुजराती……पूरे 29 मिलेंगे पर वो एक नहीं मिलेगा……. हाँ नहीं मिलता……!!!!! 

इनके अलावा भी कुछ प्रजातियाँ पाई जाती हैं…हिंदू – मुस्लिम , लड़का – लड़की , अमीर – गरीब……..पर वो एक नहीं मिलेगा……!!!!!! 

ऐसा भी नहीं है कि वो कहीं नहीं मिलता……….मिलता है…..पर अपने देश में नहीं……. हाँ अपना देश…… हाँ हिन्दुस्तान ……अपना देश……

बहुत ही तकलीफ देती है ये  बात….. जब अपने ही घर में अपने नहीं मिलते ……..                    हमारे देश का वो एक मिलता है दूसरे देशों में….. वो एक….  हाँ वो एक हिन्दुस्तानी……..आपको मिलेंगे….. अमेरिका , जापान ,आस्ट्रेलिया  में……. 

यहाँ मतलब ….हमारे देश में… मतलब हिंदुस्तान में……… कोई हिंदुस्तानी नहीं है!!!!!!!!!!!  …….यहाँ तो सब ……!!!!!

          कोई है क्या……????? 

                भ्रम 

ना जाने किस भ्रम में जी रहे हैं….                                   आज बहुत याद रही…..                     हां, आज बहुत याद आए तुम ….  तो लगा…    ना जाने किस भ्रम में जी रहे हैं हम…..   

जिंदगी तो बस  रोने के मौके देती है ……              हंसने के बहाने तो खुद ही ढूंढने पड़ते हैं !! याद आयी वो हमारी आखिरी मुलाकात ……         तो लगा….                                              जिंदगी तो बस बिछड़ने के मौके देती है……..       मिलने के बहाने तो खुद ही ढूंढने पड़ते हैं !!

याद आयी तुम्हारी वो आखिरी शिकायत…….       तो लगा…..                                               जिंदगी तो सिर्फ सांस लेने के मौके देती है …..  जिंदा रहने के बहाने तो खुद ही ढूंढने पड़ते हैं !!

फिर याद आया मुझे देख कर तुम्हारा धीरे से मुस्कुराना………. 

            ये किस भ्रम में जी रहे हैं हम……         जिंदगी तो हमें हमारे सारे ख्वाब पूरे करने के मौके देती है…………                                              बहाने तो हम खुद बनाते हैं………. अपने अपने सहूलियत के हिसाब से……….         

       किस भ्रम में जी रहे हैं हम…….